संदेश

फिल्मी दुनिया   फिल्म बनाते समय फिल्मकार का  मुख्य उद्द्शेय अधिक से अधिक पैसा कमाना होता है।  फिल्मकार नए -नए अनुभव आजमाते हैं ,जो दर्शकों को पसंद आए और उनके दिलों दिमाग पर छा जाएं।  कुछ काल्पनिक कुछ सत्य घटनाओं पर आधारित कथानक के माधय्म से फिल्म में संगीत, डायलॉग  आकर्षक दृश्यों का मिर्च मसाला मिलकर फिल्म तैयार की जाती है। फिल्म के अभिनेता अभनेत्री अगर अपने अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन करने में सफल हो जाते हैं , तो फिल्म तो दौड़ पड़ती है।  किसी भी फिल्म में नयापन  परोसना महत्वपूर्ण पासा होता है।, क्योंकि  वही  नयापन फिल्म  को आगे  बढ़ाने वाली  सीढ़ी  का काम करता है,ओर जहां तक सवाल है की किसी फिल्म की कहानी समाज में जागरूकता लाने का काम करती है  तो , इसका  श्रेय   फिल्म के  कथानक  को ही  जाता  है। 
कोई भी  फिल्मकार शायद ही समाज को  जाकरूक करने के लिए फिल्म बनाता  है। निर्देशक का मुख्य उद्द्शेय तो अधिक से अधिक पैसा वसूल करना होता है।  किसी भी फिल्म की सफलता का श्रेय  कहानी लिखने वाले  दृश्यांकर्ता  संगीतकार  व् उस फिल्म में काम करने वाले  कलाकारों को ही जाता है ,उस समय कोई भी दर्शक यह नही…
देखो हंस रहे हैंखेत खलिहान      देखो हंस रहे हैं खेत खलिहान ,                        मीठी मधुर हवा संग कर रहे हों मधुर गान।                                        आओ झूमे नाचे गाए आई है बहार।
पीली -पीली सरसों से हुआ है ,  धरती का श्रृंगार। सुनहरे रंगो की छटा चारोँ ओर।
                                        दिनकर की किरणों से चमके ,                                              चाँदनी सा जलाशयों का जल                                                सतरंगी रंगों की छठा ,मंद -मंद                                                   हवाओं से लहराती पौधों की कतार। बसंत ऋतु की आयी है बहार।, मन प्रफुल्लित सुनहरे सपनो को सच करने का संदेश निरन्तर परिश्रम का मिला है परिणाम प्रग्रति और उन्नति का है ,आशीर्वाद, जो  धरती ने कर लिया है केसरिया सुनहरा श्रृंगार, आई है, बसंत ऋतु  की   बहार।
पी के फिल्म की कहानी मेरी जुबानी!!!! पी,के, फिल्म   सादगी से फिल्माई गयी , मनोरंजन से भर -पूर् फिल्म है।  पी ,के फिल्म की कहानी को बहुत ही सुन्दर ढंग से दर्शाया गया है।     आमिर खान एक अच्छे अदाकार हैं ,उनकी अदाकारी का जादू इस फिल्म में भी भरपूर दिखाई देता है।   इस फिल्म का प्रत्येक दृश्य मन  को प्रफुल्लित करने में सक्षम है।  मनोरंजन, व्यंग तथा  एक विशिष्ट विषय पर संदेश देती, यह फिल्म ,की  भगवान कहाँ  है/ इस फिल्म का नायक भगवान को भगवान का घर कहे जाने वाले विभिन्न धर्मस्थलों  मंदिर ,मस्जिद ,चर्च इत्यादि स्थलों पर खोजता है ,पर उसे भगवान नहीं  मिलते। नायक क्योंकि दुसरे ग्रह से आया हुआ प्राणी है उसे अपने घर जाना है , वह धर्म के ठेकेदार कहे जाने वाले साधू -संतों के पास भी जाता है जहाँ उसे सब झूठ दिखाई देता है ,उसकी आत्मा उसे ग्वाही नहीं देती और वह रॉंग नंबर कहकर उनका विरोध करता है।  विभिन्न धार्मिक पाखंडों पर पी ,के, फिल्म प्रहार करती नज़र आती है। माना की भगवान का घर कहे जाने वाले  मंदिर, मस्जिद ,चर्च आदि गलत नहीं हैं।  परन्तु धर्म की आड़ में कई पाखण्ड होते हैंजिन्हे आम जन  समझ के भी नहीं स…
अमृत की रस धार 
कविता नहीं तो कवि नहीं,रस नहीं श्रृंगार नहीं। कविता मात्र शब्दों का संग्रह  नहीं , भावनाओं का अद्धभुत संगम है ,  अमृत की रसधार है।
 मन -मस्तिष्क  मे हल -चल  मचा देने वाली अद्धभुत आवाज है। . सुन्दर शब्दों की खान है , भावों का का सम्मान है। कविता कभी वात्स्ल्य ,प्रेम ,करुणा ,श्रृंगार , कभी वीर रस का पयार्य है। कभी प्रकृति की सुन्दरता का बखान है. शब्दों के द्वारा विचारों के रूप में परणित  , भावनाओं के अद्धभुत मेल का सयोंग है।
कविता अंतरात्मा में उठे तूफ़ान की आवाज है. . दिल की गहराइयों में  उतर जाने वाले भावों की आवाज है। कविता जीवन का यथार्थ है, कवियों के जीवन का चरित्रार्थ है। कविता अमरत्व की पहचान है। 





''पोशाकों में छिपा व्यक्तित्व ''                                          आधुनिक मानव का पोशाकों में छिपा व्यक्तित्व , कहतें हैं ,मनुष्य के व्यक्तित्व की पहचान उसकी  पोशाक से होती है।
                     परन्तु आधुनिक मानव की पोशाकों का क्या                    कहना ,किसी भी मानव का व्यक्तित्व सिमट कर रह गया है ,उसकी  पोशाकों में , जितनी आड़ी तिरछी पोशाक उतना ही वह धनवान आधुनिक।  नैतिकता का कोई नाम नहीं ,अनैतिकता का है बोलबाला।  आधुनिकता की दौड़ में अंधों की तरह दौड़ रहा है आज का मानव , भले बुरे का विवेक नहीं ,   दुष्कर्मों का कोई खेद नहीं। 
 अभद्रता ,अश्लीलता ,में डूबा आज का समाज  धिक्कार है धिक्कार है।  प्रसिद्धि पाने का अभद्र तरीका।    मदर टेरिसा ,इन्दिरा ग़ांधी ,इत्यादि ऐसी कई महान हस्तियों का व्यक्तित्व है मिसाल ,की मनुष्य की साधारण पोशाकों में भी बन सकती है ऊँची पहचान।   प्रसिद्धि पाने का अभद्र तरीका ,  कुछ एक ने लोभ में बेची है अपनी लाज। 
भारत माता आज खतरे में ,   है तेरे दुलारों का , मान सम्मान। मनुष्य के कर्मों में हो नैतिक…
                         ''खूबसूरत '' 
जिंदगी इतनी खूबसूरत हो सकती है ,
किसे पता था। 
मैंने प्रेम की जोत जलाई तो सारा जहाँ रोशन हो गया। 
जब नफ़रत के बीज थे ,तब कांटे -ही कांटे थे। 
बाह्य ख़ूबसूरती ही ख़ूबसूरती नज़र आती थी ,
बाह्य ख़ूबसूरती को ख़ूबसूरती समझ कई बार धोखे खाये। 
अब मैं आंतरिक यात्रा पर निकली हूँ ,
अंदर कभी झाँक -कर नहीं देखा था ,
ख़ूबसूरती का आइना मन है ,ज्ञात नहीं था ,
ख़ूबसूरती शुभ विचारोँ की निर्मलता और 
सत्यता का शृंगार 
विचारों की झाँकी चेहरे पर आ जाती है 
चेहरे केआइने  में झलक दिखला जाती है ,
मन के आइने में झलक दिखला जाती है 
अब आन्तरिक सुन्दरता पर ध्यान केन्द्रित किया है ,
प्रेम त्याग ,दया क्षमा ,आदि बन मन के हार श्रृंगार 
बड़ा रहे हैं ,चेहरे का नूर ,
विकारों से दूर , मज़हब मेरा परस्पर  प्रेम से पूर्ण 
अपना लिये हैं अपनत्व के सारे गुण ,
अपनत्व के बीज ,परस्पर प्रेम की खाद ,
ख़ूबसूरती का राज़ , ख़ूबसूरती का राज़।
जूनून
जो दिल से निकलती  ,है वही सच्ची कविता होती है , दिल में जो आग है ,तूफ़ान है  कुछ कर गुजरने का जनून है ,ऐसे लोगो को  कहाँ  सुकून है। 
दिल की हलचल ही तो वरदान है।  मनुष्य तो यूँ ही बदनाम है।  नेकी की राह चलना नहीं बहुत आसान है।  नेकी की राह पर चलने वाले मा ना  की बहुत कम हैँ। 
पर नेकी की राह पर चलने वालों की जिद्द के आगे आसमां भी बुलंद है।  यही तो जीवन का द्वन्द है , लोग क्या कहेंगे की छोड़ो  , दिल में जो  आग है , उसे करके छोड़ो।   माना की राहें बहुत तंग हैं , रोशनी के घरौंदे  तले  अँधेरा  बहुत है 
जिनके जीवन में उम्मीदों का संग है,  उन्हें मुश्किलों से लड़ जाना पसंद है। उम्मीदें ही तो भरती जीवन में नया रंग हैं। जीवन के केनवास  में सुन्दर  रंग भरना  भी एक कला है , नेकी की राह पर चलकर मंजिल पा जाने  वाले को मिलता परमानन्द है।