💐**बचपन से हमने देखा है**💐


 💐भारत की पृष्ठ भूमि पर हर 
 मज़हब शान से जीता है ।💐
 बचपन से हमने देखा है ,
 चाहे मुबारक* ईद* हो या* दीवाली *
 हमारे लिये अवकाश संग खुशियों  की सौग़ात का 
 तोहफ़ा होता है।💐💐
हम तो ईद हो या दीवाली सबमें प्रफुल्लित होते हैं ।
💐👍मुबारक ए ईद💐पर भी इबादत अमन चैन की  
   दुआ संग हर्षोल्लास से खुशियां बाँटी जाती है
   और जी जाती है।
 *दीपावली पर भी प्रभु प्रार्थना संग
  खुशियाँ बांटी जाती हैं ,और ज्ञान के
  प्रकाश का उजाला किया जाता है ।
  तातपर्य सभी का एक है ,अमन-प्रेम सुख -शांति का संदेश ।
💐💐रामायण, हो या कुरान सभी तो प्रेम संग 
भाईचारे का संदेश देते है ।
हमने तो बचपन से खुशियों को बाँटने की 
परम्परा निभायी है ।
ईद हो दीवाली हमारे चेहरों पर हर पल खुशी आयी है
हमने तो हर त्यौहार पर भाईचारे की रीत निभायी है ।

टिप्पणियाँ

  1. भारत की पृष्ठ भूमि पर हर
    मज़हब शान से जीता है ।💐
    बचपन से हमने देखा है ,
    चाहे मुबारक* ईद* हो या* दीवाली *
    हमारे लिये अवकाश संग खुशियों की सौग़ात का
    तोहफ़ा होता है।💐💐

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  2. बहुत ख़ूब ! आदरणीय सत्य वचन है सभी धर्मों का केवल एक उद्देश्य अमन और शांति सुन्दर रचना एकता का सन्देश देती। आभार ,"एकलव्य"

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  3. अमन का सन्देश फैलाती आपकी भावपूर्ण रचना सामयिक है ऋतु जी।

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  4. सत्य कहा रामायण हो या कुरान सभी प्रेम संग भाईचारे का संदेश देते हैं....
    बहुत ही सुन्दर...
    अनेकता में एकता की सूचक...

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काश की वो वक्त वहीं थम जाता । हम बड़े न होते बच्चे ही रह जाते । पर क्या करें की प्रकर्ति का नियम है ,बचपन , जवानी बुढ़ापा , दुनियां यूं ही चलती रहती है । जिसने जन्म लिया है ,उसकी मृत्यु भी शास्वत सत्य है उससे मुँह नहीं मोड़ा जा सकता ये एक कड़वा सच है । हम बात कर रहे थे ,बचपन की , बचपन क्यों अच्छा लगता है । बचपन में हमें किसी से कोई वैर नहीं होता । बचपन का भोलापन ,सादगी ,हर रंग में रंग जाने की अदा भी क्या खूब होती है । मन में कोई द्वेष नहीं दो पल को लड़े रोये, फिर मस्त । कोई तेरा मेरा नहीं निष्पाप निर्द्वेष निष्कलंक मीठा प्यारा भोला बचपन । ना जाने हम क्यों बड़े हो गये , मन में कितने द्वेष पल गये बच्चे थे तो सच्चे थे , माना की अक्ल से कच्चे थे ,फिर भी बहुत ही अच्छे थे , भोलेपन से जीते थे फरेब न किसी से करते थे तितलियों संग बातें करते थे , चाँद सितारोँ में ऊँची उड़ाने भरते थे प्रेम की मीठी भाषा से सबको मोहित करते थे । बच्चे थे तो अच्छे थे । 

*****उम्मीद की किरण*****

**औकात की बात मत करना **