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June, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
** क्या छिपा रहे हो ****   {कविता }

   * क्या छिपा रहे हो
   * कितना छिपाओगे
    *लाख छुपाओगे उजाले को
     💐उजाला किसी झिर्री से बाहर आ ही जायेगा
    💐💐💐💐💐💐
    *जो सच है ,सामने आ ही जाता है
** श्वेत मेघों की ओट में
   वो छुपा बैठा था सच
   बना-बना कर विभिन्न
   आकृतियाँ मोहित कर
   रहा था सभी को ।

  💐 आसमान की ऊँचाइयाँ
   पर जा -जाकर इतरा रहा था।
   उसी में सच्चाई दिखा
   दिल लुभा रहा था   ।

  💐 सुना था सच सामने आ ही जाता है
   अचानक तेज आँधियाँ चली
   सब अस्त-व्यस्त ।
   श्वेत मेघों का पर्दा हटा
   हो गया सब पानी-पानी ।

  शाश्वत था जो वो सामने आ गया
  लाख छुपा सत्य विभिन्न आकृतियों
  वाले श्वेत ,काले ,घने ,मेघों की ओट में ।**💐💐

***मेहनती मजदूर***

💐जीवन :------हर एक के लिये जीवन की परिभाषा अलग-अलग है ।
जब तक हम स्वयं तक सीमित रहते हैं ,तब तक हमें जीवन वैसा ही लगता है ,जैसा हम देखते और सोचते हैं। परन्तु जब हम स्वयं से बाहर निकल कर समाज,देश, दुनियाँ को देखते हैं ,तब ज्ञात होता है ,कि जीवन की परिभाषा सब के लिये भिन्न -भिन्न है ।

💐मनुष्य जब तक स्वयं तक सीमित रहता है ,वो सोचता है ,कि सबसे ज्यादा अभावग्रस्त वो ही है ,जितनी मुश्किलें और बंदिशें उसके पास हैं ,उतनी किसी के हिस्से में नहीं । परन्तु जब हम अपने घर से बाहर निकलकर देखते हैं तो ऐसे-ऐसे कष्टों में लोग जी रहे होते है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते ,तब हम पाते हैं कि हम तो बहुत बेहतर जीवन जी रहे है ,अभी तक हम बस यूँ ही रोते रहे ।
मन ही मन को ढांढस बन्धता है ,कहता है ,देख ये कैसे -कैसे जीवन जी रहे हैं ।

एक बार तपती दोपहरी में मेहनती मजदूरों को काम करते देख दिल पसीजा साथ में ही उनकी पत्नियां बच्चे सब के सब लगे हुए थे। कोई महिला इंठों का तसला सिर पर उठाए कोई रेते का बच्चे भी वहीं खेल रहे हैं मिट्टी में उन्हें कोई चिन्ता नहीं ।
आखिर मैं एक मजदूर से पूछ बैठा तुम इतनी मेहनत करते ह…

💐**बचपन से हमने देखा है**💐

💐भारत की पृष्ठ भूमि पर हर   मज़हब शान से जीता है ।💐  बचपन से हमने देखा है ,  चाहे मुबारक* ईद* हो या* दीवाली *  हमारे लिये अवकाश संग खुशियों  की सौग़ात का   तोहफ़ा होता है।💐💐 हम तो ईद हो या दीवाली सबमें प्रफुल्लित होते हैं । 💐👍मुबारक ए ईद💐पर भी इबादत अमन चैन की      दुआ संग हर्षोल्लास से खुशियां बाँटी जाती है    और जी जाती है।  *दीपावली पर भी प्रभु प्रार्थना संग   खुशियाँ बांटी जाती हैं ,और ज्ञान के   प्रकाश का उजाला किया जाता है ।   तातपर्य सभी का एक है ,अमन-प्रेम सुख -शांति का संदेश । 💐💐रामायण, हो या कुरान सभी तो प्रेम संग  भाईचारे का संदेश देते है । हमने तो बचपन से खुशियों को बाँटने की  परम्परा निभायी है । ईद हो दीवाली हमारे चेहरों पर हर पल खुशी आयी है हमने तो हर त्यौहार पर भाईचारे की रीत निभायी है ।

नकारत्मकता से सकारात्मकता की और***

**नकारत्मकता से सकारात्मकता की और***
                ****************************💐💐

**करने को तो मैं कुछ अच्छा चला था जमाने में,
 एक रोग मुझे लग गया ।
 दूसरों की बुराइयाँ ,और कमियाँ निकालने में मैं व्यस्त हो    गया ।😢

☺व्यस्त इतना हुआ कि ?

करने को तो मैं कुछ अच्छा चला था जमाने में
मुझे ही रोग लग गया ,बुराइयाँ देखते-देखते
मैं ही अब बुरा हो गया ।😢

अचानक मेरी दृष्टि बदली,मेरी आत्मा से आवाज आयी
वो मुझे धिक्कारने लगी......
शर्म से मेरी आँख झुक गयी
अश्रुओं ने मेरी की धुलाई😢😢

मेरी आत्मा ने ,परमात्मा के आगे
शीश झुका के क़सम अब खायी
नहीं देखूँगा ,में किसी की बुराई।☺

बुराई को अच्छाई में बदलने की मेरी सोच बन आयी
नकारात्मक से सकारात्मक दृष्टि मैंने पायी
नकरात्मक सोच से करके विदाई
अब सकारत्मकता के बीज मैं बोता हूँ 💐

बुराईयों की झाड़ काट-काट कर
अब अच्छाइयों के बीज बोता रहता हूँ💐💐
भले ही कुछ वक्त लगे ,पर एक दिन तो
बुराइयाँ खत्म हो जायेंगी ,अच्छाइयों
की फ़सल लहलहायेगी ।💐💐💐💐💐
बहाने बाजी से बचिये *
**********************
सामने पहाड़ है , या गहरी खायी है,पहाड़ को हम
हटा नहीं सकते ,खायी में हम कूद नहीं सकते ।

रास्ते हमे बनाने हमें किस तरह बनाने है
ये हमारी सोच, और मेहनत है।

**जब हम रास्ते पर चलते हैं ।
तो टेढ़े-मेढे ,ऊँचे-नीचे सीधे सपाट
हर तरह के मोड़ आते हैं ,जिन्दगी में
परन्तु हमें उनपर चलना पड़ता है ।

रास्तों के बहाना बनाकर रुकना यानि
हम मानसिक रूप से कमजोर हैं ,बहाने बाजी
का बहाना बना रहे हैं।
मेहनत हम स्वयं नही करते और दोषारोपण
दूसरों पर करते हैं ।
इसलिये उठिये बहानेबाजी छोड़िये
अपनी असफलता का दोषारोपण किसी
किसी दूसरे पर करने से बचें ।।
ढूंढिये कमी कहाँ है ।
और उस कमी को दूर करके अपनी किस्मत
के केनवास में रंग खुद भरिये ।**

**मोबाइल और इनटर नेट **

***माना की मोबाइल आधुनिक जीवन की बहुत बड़ी आव्यशकता और उपयोगी भी है। परन्तु इसका दिन-रात आव्यशकता से अधिक उपयोग मानव को एक लत के रूप में लग रहा है।

माना कि इनटरनेट से सब जानकारी मिलती है ,पर जब से इंटरनेट का उपयोग अधिक बढ़ गया है ,तब से मनुष्य ने अपने दिमाग़ का उपयोग करना कम कर दिया है ,जो मनुष्य की सृजनात्मक शक्ति को श्रीण कर रहा है ।

*समय रहते इस मोबाइल नाम की लत से छुटकारा नहीं मिला तो एक दिन मनुष्य
मानसिक तौर पर अकेला और अपंग हो जायेगा ।*

*आतंकवाद की जड़ों को उखाड़ फैंको*

*आखिर कब तक कितनी माताएं ,कितने लाल जन्मती    रहेंगी ,और देश को समर्पित करती रहेंगी ।

 वाह!  कितनी महान हैं ये माताएं ,पूजनीय हैं ,वंदनीय है ।*
 "आखिर कब तक कितनी माताओं के लाल शहीद होते रहेंगें।
 सरहद पर तैनात सैनिक ,हम सब की रक्षा की खातिर
 क्या बस शहीद होने के लिये हैं , माना कि ये उनका कर्म है
  धर्म है । *

  *हाय! बड़ा दर्दनीय है ये ,निन्दनीय है ये
  वो भी किसी माँ के लाडले हैं, किसी के भाई ,
  मित्र, और पति ,क्या उनकी जान की कीमत बस
  शहीद होना ही है ।*

 "बस करो आतंकवाद के आगे यूँ हर पल मरना
 वो चार मारे हमारे सैनिक उस पर फिर चार मारे छः मारे ।
 इस तरह आतंकवाद खत्म होने वाला नहीं
 आंतकवादी को जड़ से उखाड़ फैंकना है।

 ढूँढ़ो आँतकवाद की बुनियाद को ,यूँ पल-पल मरने से
 बेहतर है ,उखाड़ फैंको उनकी जड़ों को ,हिला दो आतंकवादियों की बुनियादों को ।

वो हमें डरा -डरा के हमारी जड़ें हिला रहें हैं
अब वक्त आ गया है बहुत हो गया ।
उखाड़ फैंको आतंकवाद को चाहे जो भी हो
आँकवादी अपनी आने वाली नस्लें भी खराब कर रहें है
जहरीले विचारों का जहर आगे अपने ही कुटुम्ब को भी परोस रहे है ।

जिस तरह" श्…

💐💐**संघर्ष -यानि संग-हर्ष जियो **💐

*जीवन है तो संघर्ष है *
यूं तो प्रकृति प्रदत्त सब और सम्पदा है 💐
जीवन को तो जीना है ,क्यों ना फिर
संग-हर्ष जियो ।💐
 समय का पहिया घूम रहा है
  युग परिवर्तन हो रहा है ।
  परिवर्तन प्रकृति का नियम है ।
  अविष्कार भी आवश्यकता का कारण है
  मानव बुद्धि में उपजे अणुओं ,
  मानव की दिव्य आलौकिक बुद्धि
  ने दुनियाँ को नये-नये आयाम दिये हैं
 आकाश क्या अन्तरिक्ष  में भी मानव के
 कदम पढ़े है ।
 वो चाँद जिसकी खूबसूरती को मनुष्य निहारता है
गजलें और नग़मे बनाता है ,जिस चाँद को देख महिलाएं
व्रत उपवास पूर्ण करती हैं ,उस चाँद पर जाकर वैज्ञानिक
सत्य परख आया है ।💐
मनुष्य का जीवन प्रग्रति यानि आगे बढ़ते रहने का नाम है
रुक गया तो थम गया
जीवन का अन्त हो गया ,संघर्ष जीवन का मंत्र है ।
खुशहाल जीवन का यंत्र है ।💐💐💐💐

*मेरे ख्वाब*

**जाने किसकी दुआ रंग ला रही है ,
 ख्वाबों के गुलिस्तान की क्यारियों से
 भीनी सी ,और मीठी सी सुगन्ध आ रही है *।

 " मैंने ख्वाबों में जो सपने बुने थे
  उन सपनों में मेरी वफ़ा शायद रंग
  ला रही है "।
  *ख्वाबों के सच होने का ना मुझको
  यकीन था ,ख्वाबों को देखना ,निंद्रा
  में आना ,फिर टूट जाने पर यकीन था* ।

  *मेरे ख्वाबों में निष्फल कर्म का अर्श था।
  आत्मा की आवाज़ को परमात्मा का संदेश
   जान बस कर्म करते रहने का जज़्बा था।
   शायद वही जस्बा ए कर्म ,मुझे रास आ गया
    दरिया की तरह में भी बहता रहा ।*

    *आत्मा का परमात्मा से सम्बंध हो गया
      जो उसका था सब मेरा हो गया ।
       मेरा जीवन सफ़ल हो गया ।
            सफ़ल हो गया* ।।