संदेश

February, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
देश , प्रदेश,  नेता और राजनीति ।
 👍जिस प्रकार हमारे परिवार के मुखिया अगर निष् पक्ष छवि वाला हो तो  , हो तो वह परिवार नि सन्देह तरककी करता है।

 उसी तरह अगर देश के नेता स्वार्थवाद से ऊपर उठकर देश हित में ही अपना सहयोग देंते तो देश की उन्नति अवश्य होती है और देश तरक्कि की सीढ़िया अवश्य चढ़ता है ।

चुनाव से पहले नेताओं के भाषण, सुनते ही बनते हैं नया जोश नई उमंग ,बड़े-बड़े वादे, हम अपने प्रदेश के लिये ये करे -गे वो करेंगे इतने साल देश का बुरा हाल ,आप अमुक नेता को चुनिये तब देखिये देश सुधर जाएगा अब दूर होगा भ्रष्टाचार ,गरीबों के लिये घर  अब कोई युवा बेरोजगार नहीं होगा जाने और क्या क्या बड़े-बड़े वादे ........😊😊

चुनाव से पहले हाथ जोड़कर एक -एक वोट की भीख मांगी जाती है ।
चुनाव के बाद जब कोई भी नेता जीत जाता है, तो उसके तो दोनो हाथ घी में...........और वोटर बन जाते हैं भीगी बिल्ली 😢😢
अब बेचारे वोटर बस इस इंतजार में फिर से पूरे पाँच साल बीता देते हैं कि नेता जी कब हमारी मागें पूरी करेगें ,कब हमारे प्रदेश, और देश का विकास होगा ।

नेता बनना कोई साधारण काम नहीं है ,बहुत जिम्मेवारी का काम है जी नेता…

👍 दौड़ 👍

आधूनिकता की दौड़ में मैं पीछे रह गया
संस्कार बिक रहे थे, मैं ना बिका पिछड़ा रह गया

ना नाम कमाने का शौक है
ना दाम कमाने का शौक है।

मन में जो संकल्प आते हैं
उन्हें पूरा कर गुजरने का जनून है।

जीवन सफ़ल हो अपना
बस छोटा सा सपना है अपना।

सपने कब हुए अपने हैं
नीँद ख़ुली तो टूट गये जो सपने थे।

जागती आँखों से जो देखे थे जो सपने
कर्मों की खेती से लहलहाने लगे वो सपने।

मेरा कहाँ वजूत इतना की मैं कुछ कर जाऊं
ऊप र वाला जो कराता है ,मैं वो करता रहता हूँ ।
💐 शिवरात्रि💐
   💐 देवों के देव महादेव 💐

 शिव की महिमा अनन्त है। शिव अनादि है ,शिव वो महान दिव्य शक्ति है ,जिसके हम सब अंश है  । भोलेनाथ ,शिव ही हैं जिन्होंने संसार को जहरीले विष से होने वाले विनाश से बचाने के लिये विष को स्वयं के कंठ में धारण कर लिया था ।संसार के समस्त जहरीले जीव ,पदार्थ ,परमात्मा शिव ने स्वयं में समाहित किये, संसार कल्याणार्थ ।
 परमात्मा को हम मनुष्यों से कुछ नहीं चाहिए। वो तो स्वयं दाता है। उसी से लेकर उसे देना ......
वो दिव्य प्रकाश जो कई करोड़ सूर्यों के प्रकाश से भी कई अधिक गुना प्रकाश से परिपूर्ण है ,वो दिव्य अलौकिक शक्ति है "शिव महादेव"
ब्रह्मा, विष्णु, महेश , ब्रह्मा जी से संसार की उत्पत्ति हुई ,भगवान विष्णु उस संसार की पालना करते हैं । और हमारे समाज में ये धारणा है कि जब-जब धरती पर पाप कर्म अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाते हैं ,तब-तब भगवान शंकर अपना तीसरा नेत्र खोलते हैं  प्रलय आती है और पाप कर्मो का अंत होता है। यह मान्यता गलत भी नहीं है ।
शिवरात्रि के दिन कुछ लोग उपवास भी रखते है, शिवजी को प्रसन्न करने के लिये शिवलिंग पर भेलपत्री, पुष्प …

" वास्तविक सम्पत्ति" "विचारों की संम्पत्ति"

💐💐💐💐💐💐💐💐
            💐💐💐💐💐

💐"हमारे विचार हमारी संपत्ति हैं क्यों इन पर नकारात्मक विचारों का  दीमक लगाए चलो कुछ अच्छा  सोंचे  कुछ अच्छा करें "।💐

👍मेरा मुझ पर विश्वास जरूरी है ,
मेरे हाथों की लकीरों में मेरी तकदीर
सुनहरी है ।👍

☺ यूँ ही बेवज़ह भी मुस्कराया करो ,
माहौल को खुशनुमा भी बनाया करो ।☺☺

💐अपने लिये तो सभी जीते हैं,
 पर जीवन वह सफल है ,जो औरो
के जीने के लिए भी जिया जाये ।"💐


💐मौन की भाषा जो समझ
  जाते है।वो ख़ास होते हैं ।
  क्योंकि ?
  खामोशियों में ही अक्सर
  गहरे राज होते है ।
 जुबाँ से ज्यादा मौन की भाषा
  मे कशिश होती है ।💐☺


💐अगर विचार हो खूबसूरत तो सब खूबसूरत नज़र आता है वो पत्थर ही थे जिन्हें कारीगरों की खूबसूरत सोच ने ताजमहल जैसी बेमिसाल ईमारत बना दिया ।💐

💐 "उजाले मे सब इस क़दर व्यस्त थे कि
ज्योति के उजाले का कारण किसी ने नहीं
जानना चाहा, तभी ज्योति की आह से निकला
दर्द सरेआम हो गया , आँखों से अश्रु बहने लगे
काले धुयें ने हवाओं में अपना घर कर लिया
जब तक उजाला था सब खुश थे धुआँ हुआ तो सब उसे कोसने लगे "

☺☺बच्चे थे तो सच्चे थ…
💐💐वेलेंटाइन डे💐💐
          💐💐💐💐
  कल ही मेरी सहेली का फ़ोन आया था ,कह रही थी कि कल तुम अपने बच्चों पर नज़र रखना ,कल वेलेंटाइन डे है उन्हें ज्यादा इधर -उधर मत जाने देना ,जमाना बड़ा खराब है। बे फालतू मे बच्चे किसी चक्कर मे ना फंसे ।

अपनी सहेली की बात सुनकर मैं थोड़ा चिन्ता में पड़ गयी ,मैं अपनी सहेली से बोली नहीं मैं नहीं रोक पाऊँगी अपने बेटे को , उसने मुझसे वादा किया हुआ है कि वो कोई गलत काम नहीं करेगा ।  यूँ तो मुझे उस पर बहुत विश्वास है ।  पर डर लगता है ,ज़माना बड़ा ख़राब है । मैं अपनी सहेली सुनीता को बता रही थी
 मैंने सुना था ,वो कह रहा था ,हाँ-हाँ मैं कल आ रहा हूँ तुमसे मिलने तुम तैयार रहना ।
 मैं अपने  बेटे के कमरे में जब गयी,   उसे कहने की बेटा खाना तैयार है,  आ जाओ खाना खा लो ।
 और पता है ,वो क्या कह रहा था वो कह रहा था कोई नही मम्मी को मैं सम्भाल लूँगा ।

सुनीता मुझे नहीं पता मेरे बेटे के मन मैं क्या है ।कल की कल देखी जायेगी कोई उपाय निकालती हूँ की वो कल मेरी आँखों के सामने ही रहे ।

अगला दिन वेलेंटाइन डे का दिन सुबह से ही मेरे बेटे के फोन आने शुरू हो गये ,मैं भी किसी न किसी ब…

☺रुका जीवन और रुका हुआ पानी दुर्गन्ध देता है"😊

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☺💐रुका जीवन और रुका हुआ पानी दुर्गन्ध देता है"😊💐
हर दिन की तरह उस दिन भी मैं पार्क में टहल रही थी
टहलते -टहलते थक गयी थी ,सोचा पास के बेंच पर जाकर बैठ जाऊं , बैंच के पास एक बड़ा हरा-भरा पेड़ था अमरुद का उस पर कुछ अमरुद भी लगे हुए थे ,मन में उत्साह हुआ चलो एक अमरुद तोड़ती हूँ ,पर कैसे अमरुद तो बहुत ऊपर थे ,कुछ सोचा फिर पास में पड़ा पत्थर उठाया और अमरुद पर निशाना बनाया ,पर मेरा निशाना इतना अच्छा थोड़े था कि सीधे अमरुद पर लगता और अमरुद टूट कर नीचे गिर जाता मैंने फिर दूसरा पत्थर उठाया फिर निशाना साधा , अबकी बार मेरा निशाना चूका नहीं पर अमरुद नहीं गिरा ,वहीँ बेंच पर बैठी मेरी मित्र को जा लगा , वो चिल्लायी मैं तुमको अमरुद लगती हूँ क्या ?   मैंने कहा नहीं अमरुद तो बहुत छोटा है ,माना कि सख्त होगा पर ,—-तुम्हारी तरह नहीं —–
मेरी मित्र ने मेरी तरफ देखते हुए कहा क्या मतलब ? मैंने कहा बहन ये अमरुद तो एक दिन पेड़ पर लगे -लगे पक जायेगा ,,और नरम भी हो जायेगा पर तुम तो बहुत मजबूत हो 😊मेरी मित्र भड़की और बोली तुम कहना क्या चाहती हो  ? मैंने बोला देखो बुरा मत मानो ये जो तुम्हारा चेहरा है ना ये कभी ख…
💐👌 👍"  युग बदल रहा है"👍👌💐
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  " साहित्य को फिर से पढ़ा जाने लगा है
    लगता है फिर से ,स्वर्णिम साक्षरता का
         युग आने लगा है।"

  " साहित्य की फ़सल लहलहाने लगी है
   आचरण में सभ्यता मुस्कराने लगी है ।"

 " लगता है, युग बदल रहा है,कविता,
   कहानी, लेखों को भी कोई पढ रहा है "।

  "ज्ञान का प्रकाश जगमगा रहा है
    कोई लिख, कोई पढ़ रहा है। "

" माना की लिखने के शौंक को निक्क्मों
 का शौंक कहा गया ।
 पर हम निक्क्मों का लिखना ही कई निक्क्मों
 के काम आ गया ।"

  "विचारों के मंच पर मैंने ,कुछ बीज डालें है
  कहानियों की क्यारियाँ हैं,शब्दों के मोती हैं,
  कविताओँ में मुरली की धुन है, गज़ल ऐ जज़्बात,
  मेरा लिखा किसी के लिये प्रेरणा स्रोत बन जाये
   तो मैं समझूँ की मेरा लिखना कामयाब है।।"







💐 साहित्य 💐

💐 " साहित्य  "💐

साहित्य एक फलदार वृक्ष के सामान है ।

 जिसका लाभ आने वाली पीढ़ी को मिलता है ।।


 साहित्य वो पौधा है ,जिसके बीज़ किसी

 कवि, लेखक के मन मस्तिक्ष में कविता,

 कहानी, लेख, निबन्ध ,दोहे,इत्यादि के रूप में

 पनपते हैं । जिसे कवि, लेखक सुन्दर शब्दों, की

माला में पिरोकर कुछ ,मनोरंजक, प्रेरणादायक सूत्रो में

एकत्र कर समाज के हित में समर्पित करता है ।

एक अच्छा साहित्य वही है, जो सभ्य सुन्दर समाज

की नींव रखने में सहायक हो ।

अगर आप कुछ अच्छा करना चाहते हैं ,तो कुछ अच्छे विचार भी समाज को समर्पित कर सकते हैं ।।