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नववर्ष की सुन्दर बेला “

नववर्ष के कोरे पन्ने , सुनहरी स्याही से ,भरें उज्जवल भविष्य के सूंदर सपने । सुस्वागतम्   सुस्वागतम्   नववर्ष की शुभ मंगल बेला , नयी भोर की नयी किरण है , हृदय में सबके नई उमंग है नयी उमंग संग ,  नयी तरंग संग , दिल में हो पवित्र ज्ञान का संगम । नयी पीढ़ी की नव नूतन अभिलाषाएँ  नयी विचारधाराएँ….. बढ़ने को उत्सुक प्रग्रति की राहों पर .. लिखने को उत्सुक उन्नति की नयी परिभाषायें नहीं द्वेष हमें किसी से ,ह्रदय में निर्मल प्रेम की गंगाधारा नववर्ष में खूब फले फूले खेत खलिहान ,सुख समृद्धि  करे सभी दिशाएँ “विश्व् कौटुम्बकम , सत्यमेव जयते,   अहिंसा परमोधर्म,  सर्वे भवन्तु सुखिना एकता में अनेकता . “जैसे कई महानात्माओं के वचन सत्य हो जाएँ । नववर्ष में एक प्रण है लेना, प्रस्पर प्रेम की खाद डालकर अपनत्व की फसल उगाओ, द्वेष द्वन्द, की झाड़ियाँ काटो ,हृदय में प्रेम की ज्योत जलाओ।।। मोती हैं अपने विभिन्न रंगों के , फिर भी हम एक माला के मोती अब है अपनी जिम्मेदारी नहीं बिखरे माला के मोती हम सब हैं एक दीप की ज्योति।।

धर्म और ज्ञान ,

धर्म और ज्ञान ।
दिव्य आलौकिक शक्ति जो इस सृष्टि को चला रही है , क्योंकि यह तो सत्य इस सृष्टि को चलाने वाली कोई अद्वित्य शक्ति है ,जिसे हम सांसाररिक लोग  अल्लाह ,परमात्मा ,ईसा मसीहा ,वाहे गुरु , भगवान इत्यादि ना जाने कितने नामों से पुकारते हैं , अपने इष्ट को याद करतें है।  उस शक्ति के  आगे हमारा कोई अस्तित्व नहीं तभी तो हम सांसरिक लोग उस दिव्य शक्ति को खुश करने की कोशिश में लगे रहते हैं …और कहतें है , तुम्हीं हो माता ,पिता तुम्हीं हो , तुम्हीं हो बन्धु ,सखा तुम्ही हो । दूसरी तरफ , परमात्मा के नाम पर धर्म की आड़ लेकर आतंक फैलाना बेगुनाहों मासूमों की हत्या करना,विनाश का कारण बनना , ” आतंकवादी “यह बतायें ,कि क्या कभी हमारे माता पिता यह चाहेंगे या कहेंगे, कि  जा बेटा धर्म की आड़ लेकर निर्दोष मासूमों की हत्या कर  आतंक फैला ?  नहीं कभी नहीं ना , कोई माता -पिता यह नहीं चाहता की उनकी औलादें गलत काम करें गलत राह पर चले । धर्म के नाम पर आतंक फ़ैलाने वाले लोगों ,आतंक फैलाकर स्वयं अपने धर्म का अपमान ना करो  । धर्म के नाम पर आतंक फैलाने वालों को शायद अपने धर्म का सही ज्ञान ही नहीं मिला है , कोई भी धर…