संदेश

🎉🎉" शून्य का शून्य में वीलीन हो जाना 🎉🎉

मनुष्य जीवन में ,तन का अस्तित्व राख हो जाना ,आत्मा रूपी शक्ति ,जिससे मनुष्य तन पहचान में आता है , यानि         मनुष्य का अस्तित्व धरती पर तभी तक है जब तक तन में आत्मा की ज्योत रहती है ।
दिव्य अलौकिक शक्ति जिससे आप ,मैं, हम ,तुम  और सम्पूर्ण प्राणी जगत है , सब के सब  जिस रूप में दिखाए देते हैं वह सब  एक आकार है ,या यूँ कहिए ...   ब्रह्माण्ड में व्याप्त अलौकिक शक्ति ,जिसका तेज़ इतना अधिक और उसकी शक्ति  असीमित है ,उस अलौकिक शक्ति में से कुछ शक्तियाँ विखंडित होकर के अपना अस्तित्व खोजने लगीं उन शक्तियों की शक्तियाँ भी असीमित ......उन शक्तियों ने अस्तित्व में आने  के लिये पाँच तत्वों से निर्मित एक तत्व बनाया, धरती पर निवास हेतु उस तत्व की संरचना बख़ूबी की गयी .......उसके पश्चात् उसमें आत्मा रूपी दिव्य जोत को प्रवेश कराया गया , वहीं से से मनुष्य  तन अस्तित्व में आया होगा ।    क्योंकि वह शक्ति स्वयं में ही इतनी शक्तिशाली है कि उस शक्ति ने स्वयं की शक्तियों का उपयोग करते हुए ,स्वयं के लिये धरती पर सब सुख सुविधाओं की भी व्यवस्था की , उन्हीं शक्तियों के तेज़ ने संभवतया वंश वृद्धि को …

" आत्म यात्रा "

दो अक्षर क्या पड़ लिये ,मैं तो स्वयं को विद्वान समझ बैठा ।
वो सही कह रहा था ,चार किताबें क्या पड़ लीं अपने को ज्ञानी समझ बैठे ।
उनका क्या जिन्होंने शास्त्रों को कंठस्थ किया है ,जिन्हें वेद ,ऋचाएँ ज़ुबानी याद हैं ।
ज्ञानी तो वो हैं ,जिन्होंने अपना सारा जीवन शिक्षा अद्धयन में लगा दिया जिनके पास शिक्षा  की डिग्रियों की भरमार है ,
निसंदेह बात तो सही ,जिन्होंने अपना सारा समय,अपना सारा जीवन अद्ध्य्नन कार्यों में लगा दिया ।

    दिल में ग्लानि के भाव उत्पन्न होने लगे, बात तो सही है , मैं मामूली सा स्नातक क्या हो गया, और शास्त्र लिखने की बात कहने लगा ,बात तो सही थी ,कौन सी डिग्री थी मेरे पास कोई भी नहीं .....चली लेखिका बनने .....
कुछ पल को सोचा मामूली सा लिखकर स्वयं को विद्वान समझने का भ्रम हो गया था मुझे ।
भले ही मैं विद्वान ना सही पर ,परन्तु मूर्ख भी तो नहीं ।

परन्तु बचपन से ही चाह थी , अपने मनुष्य जीवन काल में कुछ अलग करके जाना है ,जीवनोपर्जन के लिये तो सभी जीते हैं ,बस यूँ ही खाया -पिया कमाया जमा किया ,और व्यर्थ का चिंतन ,जब ज्ञात ही है कि जन्म की ख़ुशियों के संग ,   जीवन की कड़वी स…

🌺सुस्वागतम् नववर्ष का,पल -पल बदलते नये पल का 🌺

🎉🎉स्वागत करो ,पल-पल बदलते हर नये पल का🎉🎉
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"नया दौर है ,
नया युग है
"नये युग की नयी -नयी आशाएँ
नये रूप में,नये रंग में,
नये अरमानों के पंख लिये
नये ढंग से इतिहास रचने को
नयी-नयी अभिलाषाएँ।
दिवस बदलेगा ,माह बदलेगा,वर्ष भी बदलते जायेंगे
युग बदलेगा , समय का पहिया आगे बड़ता जायेगा"

नवयुवकों स्वागत करो ,पल -पल बदलते हर नये पल का
आगे बड़ता हर क्षण नया है ,
आनन्द,का हर क्षण मूल्यवान
हर क्षण आनन्द और उत्साह का
सत्यता के संग ,परिश्रम लगन,और जुनून की
आत्मिक पूँजी, है हर पल सफलता की कुंजी

सुस्वागतम् हर नये वर्ष का
समय है ये बड़े हर्ष का

माता ,बहनों के पूजन से होता है शुभारम्भ
" भारतवर्ष " के नववर्ष का ,नवसंवत्सर का

माता ,अन्नपूर्णा ,लक्ष्मी,सरस्वती और दुर्गा
आध्यात्मिकता के बीजों से सींचित
सादगी,सदाचार ,और सुख -शान्ति का सन्देश लिये
किसानों हमारे अन्नदाताओं की कड़ी मेहनत जब रंग लाती
खेतों में जब फ़सल लहलहाती
तब भी भारत के वासी नववर्ष का जश्न मानते हैं ।

चित्र
*सफलता कभी भी परिस्थितयों की मोहताज नहीं होती
आज तक जितने भी सफ़ल लोग हुये हैं, उन सब ने विपरीत परिस्थियों से लड़कर ही सफलता पायी है *

* उड़ने को पँख तो मिले थे, पँखों में उड़ान भी थी ,परन्तु उड़ने को खुला आसमान नहीं था
विचारों के समन्दर मैं पंख फड़फड़ाते थे ,विचार उड़ान तो भरते थे, परन्तु दायरे सिमित थे *

निःसंदेह यह बात तो सत्य है ,कि डिजिटल दुनियाँ ने लेखक, लेखिकाओं को , लिखने को खुला आसमान दिया
विचारों और भावों को प्रकट करने को भव्य खुला आकाश

दिल से आभार और धन्यवाद ,"prachidigital.in " का जिसने देशभर से 24 लेखकों का चयन किया

उन 24 लेखकों की 24 कहानियों की "पंखुड़ियाँ "

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" अमीरी"

अगर विचार ही संकीर्ण हों तो ,
 कोई क्या करे
  विचारों की अमीरी ने अपने जुनून और
  कर्मठता के बल पर ,कई लोगों को बादशाह
  बना दिया इतिहास इसका गवाह है ।

निर्धनता को दूर किया जा सकता है
धनकमा कर ..निर्धन होना इतना बुरा नहीं
क्योंकि परमात्मा द्वारा मनुष्य को
आत्मबल की जो अमूल्य सम्पदा प्राप्त है
उसके उचित उपयोग द्वारा निर्धन धनवान बन सकता है

परन्तु ग़रीबी ........ग़रीबी तो पनपती है मनुष्य के मन में
अगर कोई अमीर होना ही ना चाहे तो कोई क्या करे
हाँ धन की अधिकता संसाधनों मई वृद्धि अवश्य करती है ।

धन का क्या है कहीं ज़्यादा कहीं कम
अमीर बनिये दिल के अमीर ,
खाता हर कोई रोटी ही है
निधन सबका निश्चित है
अमीर और ग़रीब जाती सबकी झोली ख़ाली है ।


💐इन्तजार💐

💐इन्तजार नहीं-नहीं..... मुझे किसी का भी इन्तजार नहीं
पर शायद दिल के किसी के कोने में
करता तो हूँ, मैं भी किसी का इन्तजार
पर किसका ,नाम नहीं जानता उसका
दरवाजे पर खड़ा अक्सर झाँकता रहता हूँ
कोई नहीं है, फिर भी ना जाने किसका
इंतजार रहता है ।
शायद कोई मीठी सी महक 💐
मन्द मधुर समीर का झोंका
कोई मीठा सा एहसास दे जाये
कोई आये मुस्कराहटों की बौछार ले आये
हम भी मुस्करायें, वो भी मुस्करायें
सारा जहाँ मुस्कराना सीख जाये
नहीं किसी भी चेहरे पर
उदासी की झलक नज़र आये
सभी गिले-शिकवे ख़त्म हो जायें
आये तो अब बस बहारों के ही मौसम आयें
इन्तजार मैं रहता हूँ,अक्सर
कोई ईर्ष्या,द्वेष लोभ, अहँकार जैसी
जहरीली बिमारियों को खत्म करने की
दवा ले आये।
अब जो भी ईंसान नज़र आये
निस्वार्थ प्रेम की औषधी संग
जीने की वज़ह लेकर आये ।।💐💐💐💐💐💐💐💐
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